माननीय उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि FIR दर्ज होने से पहले ही गिरफ्तारी मेमो पर केस नंबर अंकित हो, तो यह पूरी कार्यवाही पर गंभीर संदेह उत्पन्न करता है।
न्यायालय ने माना कि ऐसी परिस्थिति अभियोजन की कहानी की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती है तथा आरोपी को जमानत प्रदान की।
यह निर्णय आपराधिक न्याय प्रणाली में निष्पक्ष जांच एवं विधिक प्रक्रिया के पालन की महत्ता को पुनः स्थापित करता है।
— गोपाल सिंह बघेल
एडवोकेट, उच्च न्यायालय जबलपुर

