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रीवा जिला अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 पर विवाद गहराया, निष्पक्ष जांच और चुनाव अधिकारी हटाने की मांग

रीवा/जबलपुर।
जिला अधिवक्ता संघ रीवा के वर्ष 2026 के चुनाव को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। संघ के कुछ नियमित सदस्यों द्वारा राज्य अधिवक्ता परिषद, उच्च न्यायालय परिसर जबलपुर को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपकर चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, आचार संहिता उल्लंघन और निष्पक्षता पर प्रश्न उठाए गए हैं। शिकायत में वर्तमान चुनाव अधिकारी को तत्काल हटाने तथा स्वतंत्र टीम द्वारा निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पर बाहरी प्रभाव पड़ रहा है, जिससे संघ की लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। आरोप है कि राज्य अधिवक्ता परिषद के कुछ पदाधिकारियों के हस्तक्षेप के कारण स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हो पा रहा है।

विशेष रूप से 6 अप्रैल 2026 को आयोजित एक कार्यक्रम के मंच का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए किए जाने को आचार संहिता का उल्लंघन बताया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित प्रत्याशी द्वारा इस प्रकार के कृत्य से चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई है, इसलिए उनके नामांकन को निरस्त किया जाना चाहिए।

एक अन्य गंभीर आरोप में बताया गया है कि न्यायालय परिसर के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। यह कृत्य न्यायालय की गरिमा के विरुद्ध बताया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है, जिसके आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

शिकायत पत्र में वर्तमान अध्यक्ष की पात्रता पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि वे लंबे समय से एक ही पद पर बने हुए हैं, जो “मॉडल बायलॉज” के प्रावधानों के विपरीत है। नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक ही पद पर लगातार निर्वाचित नहीं रह सकता।

इसके बावजूद वर्तमान अध्यक्ष द्वारा पुनः चुनाव लड़ने की तैयारी को नियमों का उल्लंघन बताया गया है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि शासकीय मंच का उपयोग व्यक्तिगत चुनाव प्रचार के लिए किया गया, जो स्पष्ट रूप से आचार संहिता के खिलाफ है।

चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सबसे गंभीर आरोप मुख्य चुनाव अधिकारी की कार्यप्रणाली पर लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सदस्यता शुल्क और मतदाता सूची के प्रबंधन में भारी अनियमितताएं हुई हैं। आरोप है कि कई अधिवक्ताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, जबकि कुछ अपात्र व्यक्तियों को शामिल कर लिया गया। इससे चुनाव की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इसके अलावा, “मॉडल बायलॉज” के नियम 24 के उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया गया है। नियम के अनुसार, चुनाव से पूर्व सभी सदस्यों को निर्धारित समय में शुल्क जमा करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके बावजूद संबंधित व्यक्तियों को मतदान का अधिकार देने की बात सामने आई है, जिसे नियमों के विपरीत बताया गया है।

इन सभी आरोपों के आधार पर शिकायतकर्ताओं ने राज्य अधिवक्ता परिषद से मांग की है कि वर्तमान चुनाव अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।

साथ ही एक स्वतंत्र और निष्पक्ष टीम का गठन कर पूरी चुनाव प्रक्रिया को पुनः संचालित किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले पदाधिकारियों और प्रत्याशियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

शिकायत के अंत में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संघ की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिवक्ताओं के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप चुनाव कराना अत्यंत आवश्यक है।

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