माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता अखिलेश निमावत की रिट याचिका स्वीकार करते हुए विभाग द्वारा जारी सेवा समाप्ति आदेशों को अवैध घोषित कर दिया।
⚖️ न्यायालय ने क्या कहा?
माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया कि —
✅ दिनांक 15.04.2021 एवं 24.01.2022 के सेवा समाप्ति (Termination) आदेश अवैध हैं।
✅ दिनांक 03.12.2021 का पुनर्स्थापना (Reinstatement) आदेश भी निरस्त (Quash) किया जाता है।
📌 न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्देश
✅ पुनः सेवा में बहाली
याचिकाकर्ता को पुनः नौकरी पर रखा जाए।
✅ स्थायी कर्मचारी का दर्जा
कर्मचारी को स्थायी कर्मचारी (Permanent Worker) के रूप में कार्य करने दिया जाए।
✅ लंबित वेतन भुगतान
दिसंबर 2020 से 31.10.2021 तक का लंबित वेतन/भुगतान, यदि अभी तक नहीं दिया गया है, तो जारी किया जाए।
⚠️ विभाग को दी गई स्वतंत्रता
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि —
➡️ विभाग चाहे तो कर्मचारी के विरुद्ध नया विभागीय जांच प्रकरण (Departmental Proceedings) प्रारंभ कर सकता है।
➡️ किन्तु ऐसी कार्यवाही पूरी तरह विधिसम्मत होनी चाहिए तथा कर्मचारी को सुनवाई का पूरा अवसर देना अनिवार्य होगा।
📖 इस निर्णय का कानूनी महत्व
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि —
✔️ बिना उचित प्रक्रिया अपनाए सेवा समाप्त करना न्यायसंगत नहीं है।
✔️ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principles of Natural Justice) का पालन आवश्यक है।
✔️ स्थायी कर्मचारी को हटाने से पूर्व विधिसम्मत विभागीय जांच अनिवार्य होती है।
⚖️ महत्वपूर्ण संदेश ⚖️
“किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई कानून सम्मत प्रक्रिया एवं निष्पक्ष सुनवाई के बिना नहीं की जा सकती।”



