झूठे दहेज प्रताड़ना केस के बाद पति को Divorce का अधिकार : SC
Landmark Judgement
(348)
(2020) 18 SCC 247
Rani Narasimha Sastry
vs.
Rani Suneela Rani
⚖️ महत्वपूर्ण निर्णय — धारा 498-A IPC एवं क्रूरता के आधार पर तलाक
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि पत्नी द्वारा पति एवं उसके परिवार के विरुद्ध धारा 498-A IPC के अंतर्गत गंभीर आरोप लगाए जाते हैं और विचारण (Trial) के पश्चात पति बरी हो जाता है, तो ऐसी स्थिति पति के प्रति मानसिक क्रूरता मानी जा सकती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल FIR दर्ज कराना या शिकायत करना मात्र क्रूरता नहीं कहा जा सकता, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को न्याय पाने हेतु शिकायत करने का अधिकार है।
किन्तु जब पति को झूठे आरोपों के कारण लंबे समय तक आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़े और अंततः वह दोषमुक्त (Acquitted) हो जाए, तो यह पति के प्रति मानसिक क्रूरता का आधार बनता है और पति हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(i-a) के अंतर्गत तलाक की डिक्री प्राप्त करने का अधिकारी होगा।
📚 Supreme Court Observation:
“It is true that mere lodging of complaint or FIR cannot ipso facto be treated as cruelty. But when a person undergoes a criminal trial under Section 498-A IPC and is ultimately acquitted, it cannot be accepted that no cruelty has been meted out to the husband.”
⚖️ निर्णय का सार:
✅ झूठे 498-A मुकदमे के बाद पति की बरी होना मानसिक क्रूरता का आधार हो सकता है।
✅ पति तलाक की डिक्री पाने का अधिकारी हो सकता है।
✅ न्यायालय ने पति के पक्ष में विवाह विच्छेद (Divorce) की डिक्री प्रदान की।


